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जाने हनुमान जी और उनकी पूजा से जुडी कुछ मुख्य बाते, हनुमान जी के 108 नाम | हनुमान जयंती त्यौहार और शनि देव से रिश्ता

राम भक्त हनुमान

महाबली हनुमान हिन्दू देवी देवताओ में सबसे बलशाली देवताओ में से एक है । हनुमान ऐसा माना जाता है की हनुमानजी भगवान् श्री शिव शंकर के रूद्र अवतार है । वो राम के परम भक्त और उनकी भक्ति में रहने के लिए धरती पर अवतरित हुए है । इन्हे संकट मोचक के नाम से भी पुकारा जाता है क्योकि ये अपने परम भक्तो को हर संकट से उबार लेते है । रामायण महाकाव्य में महर्षि वाल्मीकि ने राम चन्द्र और हनुमान के कार्यो को बहूत ही सुन्दर तरीके से पिरोहा है . रामायण के पान से यह पता चलता की हनुमान अपनी निस्वार्थ भक्ति से राम के मन मंदिर में बसे हुए है . राम जी के लिए उन्होंने असंभव कार्य भी सिद्ध कर दिया है । ऐसे राम भक्त को हम कोटि कोटि प्रणाम करते है ।

Table of Contents

कौन है हनुमान जी और इनकी महिमा

आइये जानते है श्री हनुमान जी की महिमा और शक्तियों के बारे में | हनुमान जी को हिन्दू देवताओ में सबसे शक्तिशाली माना गया है | वे रामायण जैसे महाग्रंथ के सह पात्र थे | माना जाता है की हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारवे रूद्र अवतार थे जो श्री राम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे | बजरंग बलि , मारुतिनंदन , पवनपुत्र , केशरीनंदन आदि इनके अनेको नाम है | इन्हे सात चिरंजिवियो में से एक माना जाता है | यह सभी कलायो में माहिर थे | वीरो में वीर , बुधिजीवियो में सबसे विद्वान श्री हनुमान हमेशा रहे है | इन्होने अपने पराक्रम और विद्या से अनेको कार्य चुटकी भर समय में पूर्ण कर दिए है |

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श्री हनुमान अपने शरीर को किसी भी वेश में किसी भी रूप में बदल सकते थे | वे अपने शरीर को पर्वत की तरह बड़ा सकते थे तो अगले ही पल अपने शरीर को नाख़ून से भी छोटे कर सकते थे | एक छलांग में वो हिन्द महासागर को पार कर सकते थे | वे राक्षसों , दानवो भूतो , चुडेलो के कट्टर विरोधी पर नाशक थे| यह दानवीय शक्तिया बालाजी से भय खाती थी | वे वेदों और धार्मिक ग्रंथो के महा पंडित भी थे |

हनुमान जी के प्रसिद्ध नाम और उनका मुख्य अर्थ :

केशरीनंदन : पिता केशरी के पुत्र होने के कारण इन्हे केशरीनंदन कहा जाता है |

मारुतीनंदन : मारुती का मतलब हवा , पवन से है | पवन देव के मुहबोले पुत्र होने से इन्हे मारुतिनंदन के नाम से भी पुकारा जाता है |

पवनपुत्र : पवन देव के पुत्र

अन्जनाये : माँ अंजना के पुत्र होने के कारण

महावीर : महाबली होने के कारण

संकट मोचक : संकट में साथ निभाकर संकट से पार लगाने के कारण

बालाजी :

हनुमंते :

भगवान हनुमान का जन्म और बच्चपन :

चैत्र महीने के शुक्ल अष्टमी को हनुमान सुबह 4 बजे अपनी माँ अंजना के गर्भ से इस धरती पर त्रेता युग में भगवान शिव के अवतार के अवतरित हुए |

हनुमान जी का सूर्य को निगलना :

एक बार बच्चपन में श्री हनुमान जी बहूत भूखे थे पर उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिल पा रहा था | उन्होंने हर जगह तलाश करी , पर कोई खाने का ऐसा भोज्य ऐसा नहीं मिला तो हनु की भूख मिटा सके | तब उने आकाश में लाल रंग की कुछ चीज़ चमकती हुई दिखाई दी | भूखवश उन्हें यह कोई पका हुआ फल प्रतीत हुआ | श्री हनुमान ने उस फल को खाने की चाह रखी और एक लम्बी सी छलांग मार कर उस लाल फल के करीब पहुचने लगे | वो लाल फल कोई और नहीं खुद सूर्य देवता थे | उन्होंने उस बालक को अपने समीप आते देखा तो उन्हें लगा की यह बालक मायावी है और उन्हें नुकशान पंहुचा सकता है | उन्होंने भगवान् इंद्र से अपने बचाव के लिए विनती करी | इंद्र ने अपने शक्तिशाली वज्र से बालक की ठोड़ी पर आक्रमण किया | हनु इस प्रहार से बेहोश होकर धरती पर गिर गये | जब इस घटना का पवन देव को पता चला तब अपने पुत्र की इस दुर्दशा पर उन्होंने अपनी समस्त पवन को इस ब्रह्माण्ड में बहने से रोक लिया | हर तरफ हवा के रुकने से जन जीवन अस्त वस्त होने लग गया | जीव जन्तुओ का सांस लेना दुर्लब हो गया | ब्रह्मा सहित सभी देवता उस जगह पहुचे जहा बालक हनुमान अचेतन अवस्था में पड़े थे | देव इंद्र को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने कुछ दिव्य मंत्र से बालक हनुमान को चेतन अवस्था में ले लाये | एक एक कर सभी देवताओ ने अपनी दिव्य शक्तिया हनुमान को प्रदान की | इंद्र के वज्र सहने से इनका नाम बजरंग भी रख दिया गया | पवन देव अपने पुत्र को खुशाल पाकर खुश हुए और फिर से ब्रह्माण्ड में पवन बहने लगी |

पूर्ण समर्प्रित भक्त श्री राम के :

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कहा जाता है की श्री हनुमानजी का जन्म ही राम भक्ति और उनके कार्यो को पूर्ण करने के लिए हुआ है | उनकी हर सांस में हर खून की बूंद में राम बसे है | एक प्रसंग में विभीषण के ताना मारने पर हनुमानजी ने सीना चिर कर भरी सभा में राम और जानकी के दर्शन अपने सीने में करा दिए थे | हनुमान जी भगवान श्री राम और लक्ष्मण से किशकिन्दा में मिले जब वो दोनों माता सीता की तलाश कर रहे थे | श्री हनुमान वानरराज सुग्रीव के परम मित्र और उनकी वानर सेना के सेनापति थे अपरहण के बाद माता सीता से भेट करने वाले राम के प्रथम दूत श्री हनुमान ही थे |

श्री पवनपुत्र हनुमान बालाजी का परिवार

महावीर हनुमान को भगवान शिव का ११वा रूद्र अवतार कहा जाता है और वे प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त है |

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हनुमान जी के माता पिता :

हनुमान जी वानर जाति में जन्म लिए | उनकी माता का नाम अंजना ( अंजनी ) था और उनके पिता वानरराज केशरी थे | इसी कारण इन्हे अन्जनाय केसरीनंदन आदि नामो से पुकारा जाता है |

हनुमान जो को पवन पुत्र भी कहते है :

हनुमान भक्त श्री हनुमानजी को पवनपुत्र , मारुतिनंदन के नाम से भी पुकारते है . इसके पीछे यह कथा है |
ऐसा कहा जाता है की हनुमान जी के जन्म के पीछे पवन (हवा) का भी योगदान था | हुआ ऐसा की एक बार अयोध्या के राजा दशरथ अपनी पत्नियों के साथ हवन कर रहे थे | यह हवन पुत्र प्राप्ति के लिए किया जा रहा था | हवन समाप्ति के बाद गुरु ने प्रसाद की खीर तीनो रानियों में थोड़ी थोड़ी बाट दी | खीर का एक भाग एक कौआ अपने साथ एक जगह ले गया जहा अंजनी माँ तपस्या कर रही थी | यह सब भगवान शिव और वायु देव के इच्छा अनुसार हो रहा था | तपस्या करती अंजना के हाथ में जब खीर आई तो वो उसे शिवजी का प्रसाद समझ कर ग्रहण कर लिया | और उसकी प्रसाद की वजह से हनुमान जी का जन्म हुआ |

हनुमान कृपा के लिए निर्देश नियम :

हनुमान जी के भक्तो के लिए कुछ विशेष नियम बताये गये है जिनका पालन करके आप अधिक से अधिक हनुमान जी की कृपा के पात्र बन सकते है | हनुमान जी को बाल ब्रहमचारी माना जाता है और इसी कारण कुछ विशेष नियम इनकी पूजा आराधना में लागू होते है | आइये जानते है वो सभी बाते |

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  • हनुमानजी के चरणों में और उनकी सेवा में खुद को समर्प्रित करे |
  • हनुमान चालीसा नित्य पढ़े या तो सुबह नहाने के बाद या रात्रि में सोने से पहले |
  • हो सके तो रोज हनुमान के किसी भी मंदिर में जाकर दर्शन करे |
  • हनुमानजी को अतिखुश करना हो तो श्री राम का भी सुमिरण करे |
  • केले और गुड चना का प्रसाद वानरों और जरुरतमंदों को दे |
  • हनुमान चालीसा के एक एक शब्द का अर्थ जाने और पढ़ते समय मन लगाकर पढ़े |
  • हनुमान मंदिरों में दान करे |
  • हनुमान जी भक्ति सयंम और पूर्ण समर्प्रित होकर करे |
  • मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी का व्रत करे |
  • अपनी मानवता और अच्छे गुणों को बढ़ाये, नारी बच्चो के प्रति सम्मान रखे |
  • हनुमान चालीसा की पुस्तिका मंदिरों में और हनुमान भक्तो में बटवाए |
  • जरुरतमंदो के लिए दान जरुर करे |
  • सप्ताह में एक बार हनुमान जी के सुन्दरकाण्ड का पाठ जरुर करे |
  • हो सके तो हनुमान जी के नाम की माला या अंगूठी जरुर पहने |
  • हनुमानजी के मंत्र का जाप करे
  • हर दिन अपने सुखो और दुखो के लिए धनवाद करे |

हनुमान जयंती का त्यौहार – बालाजी का जन्मदिन

हनुमान जी के प्रसिद्ध नाम और उनका मुख्य अर्थ :

हनुमान जयंती का त्यौहार बालाजी के भक्तो के लिए सबसे बड़ा त्यौहार है | हनुमान जयंती राम भक्त हनुमान जी के जन्मोस्त्सव के रूप में बड़ी धूम धाम से हनुमान भक्तो के द्वारा मनाई जाती है |

महावीर हनुमान को सबसे शक्तिशाली देवता के रूप में पूजा जाता है |श्री हनुमान जयंती त्यौहार इन्होने भगवान श्री राम के चरणों में अपने जीवन को समर्प्रीत कर दिया और राम भक्ति में इनका कोई सानी नहीं है | ये अमर और चिरंजीवी है | इन्होने असंभव कार्यो को चुटकी भर पल में समूर्ण कर दिया है , अतः इन्हे संकट मोचक के नाम से भी पुकारा जाता है |
इनकी भक्ति करने से हनुमान कृपा के द्वारा मनुष्य को शक्ति और समर्पण प्राप्त होता है | इनकी भक्ति से अच्छा भाग्य और विदुता भी प्राप्त होती है |

हनुमान जयन्ती कब मनाई जाती है :

हनुमान जयन्ती भगवान् महावीर हनुमान जी के जन्मोत्सव के मनाई जाती है | यह दिन चैत्र शुक्ल पुर्णिमा का दिन था | माना जाता है की सुबह 4 बजे उन्होंने माँ अंजना के कोख से जन्म लिया था | वे भगवान् शिव के ११वे अवतार थे जो वानर देव के रूप में इस धरा पर राम भक्ति और राम कार्य सिद्ध करने अवतरित हुए थे |

कैसे मनाये हनुमान जयंती :

हनुमान जयन्ती के इस दिन हनुमान भक्तो की भरी भीड़ बालाजी मंदिरों में अपने आराध्य देव महावीर हनुमान के दर्शन करने और उनका आशीष लेने जाते है | बड़ी उत्सुकता और जोश के साथ समर्प्रित होकर इनकी पूजा की जाती है | कहा जाता है की ये बाल ब्रह्मचारी थे इसलिए इन्हे जनेऊ भी पहनाई जाती है . हनुमानजी की मूर्तियों पर सिंदूर और चांदी का व्रक चढ़ाया जाता है | कहा जाता है राम की लम्बी उम्र के लिए एक बार हनुमान जी अपने पुरे शरीर पर सिंदूर चदा लिया था और इसी कारण उन्हें और उनके भक्तो को सिंदूर चदाना बहूत अच्छा लगता है | संध्या के समय दक्षिण मुखी हनुमान मूर्ति के सामने शुद्ध होकर हनुमान जी के चमत्कारी मंत्रो का भी जाप किया जाये तो यह अति फलदाई है | हनुमान जयंती पर रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड >पाठ को पढना भी हनुमानजी को प्रसन्न करता है |

हनुमानजी के शक्तिशाली मंत्र

श्री राम के परम भक्त हनुमान जी महाराज आठ चिरंजीवियो में से एक है जो अनंत काल से अपने भक्तो के आस पास ही रहते है और उनसे खुश होकर उनकी मनोकामनाओ को पूर्ण करते है | हनुमान जी जल्द ही प्रसन्न होने वाले देवताओ में से एक है और इसके लिए कुछ चमत्कारी मंत्र यहा बताये जा रहे है | इन मंत्रो की सही विधि जान कर आप इनका जाप करे जिससे की बालाजी प्रसन्न होकर आप पर कृपा बरसाए |

हनुमान जी के सिद्ध चमत्कारी मंत्र

भय नाश करने के लिए हनुमान मंत्र : हं हनुमंते नम:

प्रेत भुत बाधा दूर करने के लिए मंत्र : हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।

द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र : ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।

मनोकामना पूर्ण करवाने के लिए मानता : महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।।

शत्रुओ और रोगों पर विजय पाने के लिए : ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा

:संकट दूर करने का हनुमान मंत्र : ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा

कर्ज से मुक्ति के लिए मंत्र : : ऊँ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

हनुमान जी की पूजा के नियम

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जब कोई भक्त हनुमानजी को सच्चे मन से समर्प्रित होकर याद करता है तब आसानी से हनुमानजी उस पर प्रसन्न हो जाते है | हम्हे यह जानना चाहिए की वो अपने भक्तो से क्या क्या चाहते है | जैसा की हम जानते है की वो राम के परम भक्त है और खुद वानर है अत: प्रभु राम की भक्ति और वानरों को गुड चन्ने और केले का प्रसाद खिलाना , अचूक उपाय है हनुमान जी को खुश करने का | इसके अलावा हनुमान जी को सिंदूर लगाना भी सबसे प्रिय पूजा के भागो में से एक है |  हनुमान जी अपने माँ पिता के बड़े लाडले थे अत: माँ अंजना और पिता केसरी के जयकारे से भी हनुमान अति शिग्रह प्रसन्न होते है |

आइये जाने हनुमानजी को खुश करके उनकी विशेष कृपा पाने के कुछ नियम और कार्य

  • हर दिन भगवान श्री हनुमान की मूर्ति या तश्वीर या हो सके तो मंदिर में जा कर दर्शन करे |
  • सुबह जगने के बाद और रात्रि में सोने से पहले हनुमान चालीसा या हनुमान मंत्र का जाप करे |
  • दिन में कम से कम एक बार हनुमान चालीसा पूर्ण ध्यान और समझते हुए पढ़े |
  • यदि हो सके तो पूर्ण रूप से मांसारी खाना और मादक पेय त्याग दे |
  • हनुमान भक्त को श्री राम और माँ जानकी की भी पूजा करनी चाहिए |
  • हो सके तो मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी का व्रत करना चाहिए |
  • हर मंगलवार या शनिवार को हनुमान मंदिर में बालाजी की लाल मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाना चाहिए उसके बाद जनेऊ पहनानी चाहिए फिर उन्हें गुड चन्ना या केले का प्रसाद चढ़ा कर हो सके तो वानरों को यह प्रसाद खिलाना चाहिए |

इस तरह इन बातो का ध्यान और पालन करते हुए आप बालाजी महाराज की विशेष कृपा के पात्र बन सकते है | समर्पण और धैर्य ही उचित कुंजी है हनुमान कृपा द्वार खोलने के लिए |

हनुमान जी की आरती हिंदी में

महाबली श्री हनुमान जी महाराज की आरती का पाठ करे | इस आरती के माध्यम से श्री बालाजी महाराज की महिमा का प्रकाश फैलाया गया है | श्री राम के कारज साधने वाले ,लक्ष्मण को जीवन संजीवनी देने वाले असुरो का दमन करने वाले श्री हनुमान की आरती अति भव्य है | साथ में श्री राम जी की आरती का भी पाठ करे |

हनुमान जी की आरती

आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके।

अंजनी पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई।
दे वीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाई।

लंका सी कोट समुद्र सी खाई, जात पवन सुत बार न लाई।
लंका जारि असुर सब मारे, राजा राम के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित परे धरनि पे, आनि संजीवन प्राण उबारे।
पैठि पाताल तोरि यम कारे, अहिरावन की भुजा उखारे।

बाएं भुजा सब असुर संहारे, दाहिनी भुजा सब सन्त उबारे।
आरती करत सकल सुर नर नारी, जय जय जय हनुमान उचारी।

कंचन थार कपूर की बाती, आरती करत अंजनी माई।
जो हनुमानजी की आरती गावै, बसि बैकुण्ठ अमर फल पावै।

लंका विध्वंस किसो रघुराई, तुलसीदस स्वामी कीर्ति गाई।
आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके।

श्री हनुमान चालीसा

हिन्दू देवी देवताओ के चालिसाओ में हनुमान चालीसा को सबसे विशेष स्थान दिया गया है | हनुमान भक्तो को इसके एक एक शब्द याद है | हनुमान चालीसा को लाल रंग से लिखा गया है क्योकि बालाजी को लाल रंग अति प्रिय है | हनुमान चालीसा बड़ी से बड़ी नकारात्मक उर्जा को नाश करने वाला है | रात्रि में इसके पाठ करके सोने से बुरे सपने नहीं आते | तुलसीदास ने इसकी रचना की है | इसे सुन्दरकाण्ड पाठ का सार भी बताया जाता है |

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥

कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥

सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥

लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥

रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥

आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥

सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥

राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥

दोहा

पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

श्री हनुमान कवच

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हनुमान कवच किसने रचा और क्या शक्ति है इसमे

यह कवच स्वं भगवान श्री रामचन्द्र द्वारा रचा और पढ़ा गया है | इस हनुमत कवच का पाठ प्रभु श्रीराम ने स्वयं रावण से युद्ध करते समय किया था। श्री हनुमान कवच अपने आप में भगवान की शक्ति रखता है जिसके प्रभाव से बुराइयों पर जीत पाई जा सकती है | हनुमान भक्त इस कवच की अशीम शक्ति को जानते है | इस कवच की शक्ति को मन को एकाग्रः करके अशीम साधना से जगाया जा सकता है | यह कहा जाता है की यह महावीर हनुमान का शक्तिग्रह है |

हनुमान कवच से होने वाले लाभ :

इस कवच से भूत, प्रेत , चांडाल , राक्षश व अन्य बुरी आत्मायो से बचाव किया जा सकता है | यह कवच आपको टोनो टोटको से बचाता है और आपकी रक्षा करता है | काला जादू इस पर पूरी तरह पराजित हो जाता है | इस कवच का पूर्ण लाभ से जीवन के सभी शोक मिट जाते है अतः इसे शोकनाशं भी पुकारा जाता है |

मूल मंत्र :

इस कवच का मूल मंत्र है : ॐ श्री हनुमंते नमः
इस मंत्र का उच्चारण 108 बार रुद्राक्ष की माला के साथ सच्चे मन से करे और यह उपासना संपन्न होने के बाद अपने शोक निवारण के लिए हनुमानजी से विनती करे | इसके बाद हनुमानजी को चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ावे | साथ में यदि हनुमानजी को चोला और जनेऊ पहना सके तो और भी उत्तम है |

बालाजी का सुन्दरकाण्ड पाठ

हनुमान जी को संकटमोचक के यह संसार जानता है । बड़ी से बड़ी नकारात्मक शक्तियाँ इनका नाम और चालीसा जपने से ही दूर भाग जाती है | इसके साथ साथ सुंदर कांड का पाठ करने से मन को शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है |

क्या है हनुमान जी सुन्दरकाण्ड पाठ :

गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस सुन्दरकाण्ड पाठ है जिसमे हनुमानजी की महान लीलाओ और शक्तियों को वर्णित किया गया है | इस काण्ड में हनुमानजी का समुन्द्र पार करके लंका जाना , माता सीता और विभीषण से मिलना , लंका को आग लगाना और लंका वापसी के प्रसंग आते है | हनुमानजी की सबसे अच्छी कार्यो को संपन्न करने के कारण इसे सुन्दरकाण्ड का नाम दिया गया है | यह हनुमान की विजय यात्रा और महाबली की लीलाओ का दर्पण है | यह रामचरितमानस का पांचवा काण्ड है |

सुन्दरकाण्ड पाठ से होने वाले लाभ :

ज्योतिषियों की माने तो इस का पाठ शनिवार और मंगलवार करने से आपकी सभी परेशानियाँ दूर हो जाती है | जिस जगह यह पाठ किया जाता है वहा नकारात्मक उर्जा का वास नही होता | सभी घर में आत्मविश्वास से पूर्ण हो जाते है | ग्रहों की दशा सुधर जाती है | शनि की साढ़े साती व ढैय्या में इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है। माना भी जाता है की हनुमान भक्तो पर शनि की विशेष कृपा रहती है |

सुन्दरकाण्ड पाठ करते समय ध्यान रखे

हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए विधिवत और सही नियमो के साथ हनुमानजी के सुन्दरकाण्ड का पाठ आस्था और विश्वास के साथ करना चाहिए | इस पाठ को एक बार पूर्ण करने में 2 से 3 घंटे का समय लगता है | पाठ करते समय शांति से और पूर्ण ध्यान के साथ यह पाठन करे | पाठ मंगलवार और शनिवार को करना अधिक कृपा देने वाला है | अच्छी तरह सुन्दरकाण्ड पाठ विधि के नियमो से यह धार्मिक पाठ करे |

सुन्दरकाण्ड पाठ से जुड़े कुछ नियम और पाठ विधि :

पाठ करने से पहले भक्त स्नान करके स्वत्छ वस्त्र धारण करे |

जहा पाठ करे वहा हनुमानजी और श्री राम की फोटो या प्रतिमा पर पुष्पमाला चढ़ाकर दीप जलाये और भोग में गुड चन्ने या लड्डू का भोग अर्पित करे |

पाठ शुरू करने से पहले सबसे पहले श्री गणेश की पूजा करे फिर अपने गुरु की , पितरो की फिर श्री राम की वंदना करके सुन्दरकाण्ड का पाठ शुरू करे |

पाठ के बीच में कोई बात ना करे बस पाठ को पूर्ण करने में ही ध्यान दे |

पाठ समाप्त होने के बाद श्री हनुमान आरती और श्री राम जी आरती करे और पाठ में भाग लेने वालो को आरती और प्रसाद दे |

हनुमानजी और शनि देव जी का रिश्ता

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क्यों शनिदेव जी के ऊपर शनिवार को तेल चढ़ाया जाता है जाने इस कहानी से :

एक बार महावीर हनुमान श्री राम के किसी कार्य में व्यस्त थे | उस जगह से शनिदेव जी गुजर रहे थे की रास्ते में उन्हें हनुमान जी दिखाई पड़े | अपने स्वभाव की वजह से शनिदेव जी को शरारत सूझी और वे उस रामकार्य में विध्न डालने हनुमान जी के पास पहुच गये | हनुमानजी शनि देव को चेतावनी दी और उन्हें ऐसा करने से रोका पर शनिदेव जी नहीं माने | हनुमानजी ने तब शनिदेव जी को अपनी पूंछ से जकड लिया और फिर से राम कार्य करने लगे | कार्य के दौरान वे इधर उधर खुद के कार्य कर रहे थे | इस दौरान शनिदेवजी को बहूत सारी छोटे आई | शनिदेव ने बहूत प्रयास किया पर बालाजी की कैद से खुद को छुड़ा नहीं पाए | उन्होंने हनुमंते से बहूत विनती की पर हनुमानजी कार्य में खोये हुए थे |

जब राम कार्य ख़त्म हुआ तब उन्हें शनिदेवजी का ख्याल आया और तब उन्होंने शनिदेव को आजाद किया | शनिदेव जी को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने हनुमानजी से माफ़ी मांगी की वे कभी भी राम और हनुमान जी के कार्यो में कोई विध्न नहीं डालेंगे | और श्री राम और हनुमान जी के भक्तो को उनका विशेष आशीष प्राप्त होगा |

शनिदेव जी भगवान श्री हनुमान से कुछ सरसों का तेल माँगा जिसे वो अपने घावो पर लगा सके और जल्द ही चोटो से उभर सके | हनुमानजी ने उन्हें वो तेल उपलब्द करवाया और इस तरह शनिदेव के जख्म ठीक हुए |

तब शनिदेव जी ने कहा की इस याद में जो भी भक्त शनिवार के दिन मुझपर सरसों का तेल चदायेगा उसे मेरा विशेष आशीष प्राप्त होगा |

हनुमानजी ने शनिदेव को रावण की जेल से मुक्त करवाया :

एक कथा के अनुसार अहंकारी लंकापति रावण ने शनिदेव जो को कैद कर लिया और उन्हें लंका में एक जेल में डाल दिया | जब तक हनुमानजी लंका नहीं पहुचे तब तक शनिदेव उसी जेल में कैद रहे |

जब हनुमान सीता मैया की खोज में लंका में आये तब माँ जानकी को खोजते खोजते उन्हें भगवान् शनि देव जेल में कैद मिले | हनुमानजी ने तब शनि भगवान को आजाद करवाया | आजादी के बाद उन्होंने हनुमंते का धन्वाद किया और उनके भक्तो पर विशेष कृपा बनाये रखने का वचन दिया |

108 नामावली – श्री हनुमान जी के 108 नाम

हनुमान जी के प्रसिद्ध नाम और उनका मुख्य अर्थ :

श्री हनुमान जी अष्ट चिरंजिवियो में से एक है और अपने भक्तो की रक्षार्थ सदैव तत्पर रहते है | बालाजी महाराज के 108 नमो के साथ यदि हनुमान जी के चमत्कारी मंत्रो का भी जाप किया जाये तो यह अति फलदाई है |

  1. ॐ हनुमते नमः
  2. ॐ श्रीप्रदाया नमः
  3. ॐ वायुपूत्राया नमः
  4. ॐ अजराया नमः
  5. ॐ अमृत्याया नमः
  6. ॐ मारुताथमज़ाया नमः
  7. ॐ विराविराया नमः
  8. ॐ ग्रामवासाया नमः
  9. ॐ जनश्रयड़ायाया नमः
  10. ॐ रुद्राया नमः
  11. ॐ अनागाया नमः
  12. ॐ धनदायाया नमः
  13. ॐ अकायाये नमः
  14. ॐ विरये नमः
  15. ॐ वागमिने नमः
  16. ॐ पिंगाकशाये नमः
  17. ॐ वारदाये नमः
  18. ॐ सीता शोकविनाशनाये नमः
  19. ॐ रक्तावाससे नमः
  20. ॐ शिवाये नमः
  21. ॐ निधिपटये नमः
  22. ॐ मुनाये नमः
  23. ॐ शरवाये नमः
  24. ॐ व्यक्ताव्यकताये नमः
  25. ॐ रासाधराये नमः
  26. ॐ पिंगाकेशाये नमः
  27. ॐ पिंगरोमने नमः
  28. ॐ श्रुतिगामयाये नमः
  29. ॐ सानातनाया नमः
  30. ॐ पराये नमः
  31. : ॐ अव्यकताये नमः
  32. ॐ अनादाये नमः
  33. ॐ भगवाते नमः
  34. ॐ डेवाये नमः
  35. ॐ विश्वहेटावे नमः
  36. ॐ निराश्रयाये नमः
  37. ॐ आरोगयकारते नमः
  38. ॐ विश्वेश्वाये नमः
  39. ॐ विश्वानायाकाये नमः
  40. ॐ हरिश्वराये नमः
  41. ॐ विश्वमुरताया नमः
  42. ॐ विश्वकाराये नमः
  43. ॐ विषडाये नमः
  44. ॐ विश्वात्मनाय नमः
  45. ॐ विश्वाहाराया नमः
  46. ॐ राव्याय नमः
  47. ॐ विश्वचेशलाये नमः
  48. ॐ विश्वासेवायाय नमः
  49. ॐ विश्वाया नमः
  50. ॐ विश्वागम्याय नमः
  51. ॐ विश्वाध्ययाये नमः
  52. ॐ बालाये नमः
  53. ॐ वृधाध्यये नमः
  54. ॐ यूनाया नमः
  55. ॐ कलाधराये नमः
  56. ॐ प्लावंगगमये नमः
  57. ॐ कपिशेषतया नमः
  58. ॐ विडयाये नमः
  59. ॐ ज्येष्ताये नमः
  60. ॐ तटवाये नमः
  61. वनचराये नमः
  62. ॐ तत्वगामयये नमः
  63. ॐ सखये नमः
  64. ॐ अजाये नमः
  65. ॐ अंजनीसूनावे नमः
  66. ॐ अवायगराये नमः
  67. ॐ भार्गाये नमः
  68. ॐ रामाये नमः
  69. ॐ रामभक्ताये नमः
  70. ॐ कल्याणाये नमः
  71. ॐ प्राकृतिस्तिराया नमः
  72. ॐ विश्वंभाराये नमः
  73. ॐ ग्रामासवंताय नमः
  74. ॐ धराधराय नमः
  75. ॐ भुरलोकाय नमः
  76. ॐ भुवरलोकाय नमः
  77. ॐ स्वर्गालोकाया नमः
  78. ॐ महालोकाय नमः
  79. ॐ जनलोकाय नमः
  80. ॐ तापसे नमः
  81. ॐ अव्यायाया नमः
  82. ॐ सत्याये नमः
  83. ॐ ओंकार्जमयाये नमः
  84. ॐ प्राणवाये नमः
  85. ॐ व्यापकाये नमः
  86. ॐ अमलाये नमः
  87. ॐ शिवधर्मा-प्रतिष्ताये नमः
  88. ॐ रमेशतात्राया नमः
  89. ॐ फाल्गुणप्रियायेया नमः
  90. ॐ राक्षोधनाया नमः
  91. ॐ पंदारिकाक्षायाया नमः
  92. ॐ दिवाकाराया नमः
  93. ॐ समप्रभाये नमः
  94. ॐ द्रोनहार्ताया नमः
  95. ॐ शक्ति राक्षसाया नमः
  96. ॐ गोसपदिकृिताया नमः
  97. ॐ वारिशाये नमः
  98. ॐ पूर्णकमाया नमः
  99. ॐ धरा धिप्प्याय नमः
  100. ॐ शक्ति राक्षसाया नमः
  101. ॐ मारकायाया नमः
  102. ॐ रामदूठाया नमः
  103. ॐ कृष्णाया नमः
  104. ॐ शरणागतवत्सलाया नमः
  105. ॐ जानकीपराणदाताया नमः
  106. ॐ रक्षप्रानहारकाया नमः
  107. ॐ पूर्णाया नमः
  108. ॐ सत्याये नमः
  109. ॐ पितावाससेया नमः
  110. ॐ डेवाया नमः

यही हनुमान जी बजरंग बलि के 108 नामावली है 

पुत्र प्राप्ति की हनुमान कहानी :

एक समय की बात है एक ब्राह्मण पत्नी और पति थे | उनके कोई संतान नही थी इसी कारणवश वे दुखी थे | ब्राह्मण हनुमान जी का परम भक्त था और अपनी हर प्राथना में संतान प्राप्ति की ही विनती करता था | दूसरी तरफ उसकी पत्नी भी बालाजी की परमभक्त थी , वह भी हर मंगलवार हनुमानजी का व्रत रखती थी और अपने सम्पूर्ण दिन को हनुमानजी की सेवा में लगा देती थी | एक मंगलवार ऐसा आया जब वो हनुमान जी भोग के लिए प्रसाद की व्यवस्था नहीं कर सकी | उसे उस दिन बहूत दुःख हुआ और उसने यह प्रण लिया की अब वो पुरे सप्ताह व्रत रखेगी | सप्ताह भर भूखे पेट रहने से वो महिला बड़ी कमजोर हो गयी | भगवान श्री हनुमान अपने इस भक्त यह त्याग देख रहे थे | अब उनसे भी रहा ना गया और उन्होंने उस महिला को बालक के रूप में दर्शन दिए | महिला उस बालक के चरणों में गिर गयी , वो समझ चुकी थी की वो बालक कोई और नहीं अपितु हनुमान ही है |

बालक हनुमान ने उन्हें आशीष रूप में एक पुत्र दिया जिसका नाम उस महिला ने मंगल रखा | उसके बाद हनुमान जी अद्रश्य हो गये | शाम को जब ब्राह्मण घर आया तब उसने देखा की उनके घर के आँगन में कोई बालक खेल रहा है |

ब्राह्मण पत्नी ने अपनी आपबीती और हनुमान जी कृपा के बारे में ब्राह्मण को बताया परन्तु उसके पति को उसपर तनिक विश्वास नहीं हुआ | वो उस बच्चे से नफरत करने लगा और मन ही मन उसे मारने के योजना बनाने लगा |

एक दिन उसने देखा की मंगल कुवे पर पानी खीचने जा रहा था | वो ब्राह्मण उसके पीछे पीछे गया और मोका मिलते ही मंगल को धक्का देकर कुवे में दखेल दिया और फिर घर आ गया | लेकिन अब उसको खुद से नफरत होने लगी की उसने एक बालक को मौत के मुंह में छोड़ दिया |

उसे खुद से इतनी गलानी हुई की वो अपनी पत्नी के सामने भी नहीं आ सकता था | इसी कारण उनसे घर छोड़ने का निर्णय लिया | तभी मंगल उसके सामने आ गया | ब्राह्मण को अपनी आँखों पर यकीन नही हो पा रहा था | रात्रि में हनुमानजी ने ब्राह्मण को सपने में दर्शन दिए और बोले की अपनी पत्नी की हर बात पर यकीन करो वो सत्य ही बोल रही है |

तब ब्राह्मण को महसूस हुआ की उनसे बहूत गलत किया है , उसने अपनी पत्नी से माफ़ी मांगी और फिर वो ख़ुशी ख़ुशी अपने पुत्र मंगल के साथ रहने लगे |
इस तरह हनुमान जी ने जेसे इस ब्राह्मण जोड़े को अपना आशीष दिया वेसे ही सभी भक्तो पर अपना आशीष रखे |

जय जय श्री मंगल करण हनुमान जी महाराज

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श्री राम भक्त हनुमान

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